हे भारत के रणबाँकुरे,
माटी तुम पर इतराए रे।
सीमा पर जब तुम डट जाओ,
दुश्मन थर-थर काँपे रे॥
माँ के आँचल की सौगंध लिए,
तुमने वचन निभाए रे।
हँसते-हँसते शीश चढ़ाकर,
देश का मान बढ़ाए रे॥
ढोल नगाड़े गूंजे गाँव में,
जब वीरों का नाम लिया।
त्याग, शौर्य और बलिदान ने,
भारत को महान किया॥
जन-जन गाए गीत तुम्हारे,
हर मन शीश नवाए रे।
हे भारत के परमवीर,
लोक हृदय में समाए रे॥
-रोहित आनंद ,बांका,बिहारडी. मेहरपुर