उत्तराखण्ड

आपने कभी महसूस किया…? – मणि अग्रवाल

neerajtimes.com – जीवन में आपको बहुत से सम्बन्ध निभाने पड़ते हैं। कुछ सम्बन्ध जन्म के साथ ही जुड़ जाते हैं, कुछ आपके व्यापारिक सम्बन्ध होते हैं, कुछ सामाजिक, कुछ मित्रता के। वक़्त के साथ इनमें परिवर्तन भी आता रहता है।

यूँ तो आजकल कोई भी रिश्ता निःस्वार्थ नहीं रह गया है। कुछ लोग आपसे और कुछ से आप सिर्फ़ इसलिए सम्बन्ध निभाते रहते हैं कि दोनों के ही कुछ मतलब सिद्ध हो रहे होते हैं। भले ही उनके पीछे आप और आपकी ग़ैर मौज़ूदगी में वो एक-दूसरे पर  छींटाकशी करते रहते हों।

इसके बावज़ूद भी कभी किसी सफर के दौरान या किसी सामूहिक उत्सव में बहुत से चेहरों के बीच कोई एक चेहरा आपको विशेष रूप से आकर्षित करता है और आपकी स्मृति में रह जाता है जिसे आप अक्सर याद करते हैं।

कभी ऐसा भी होता है कि ऐसी ही अचानक हुई मुलाकात आपस में  एक सशक्त सम्बन्ध जोड़ देती है। और यह रिश्ता एकदम निःस्वार्थ होता है।

ऐसा क्यों होता है?

शायद आपने भी महसूस किया हो, कि कुछ लोगों से बहुत सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और हजारों की भीड़ में भी ऐसे लोग आपके मन में अलग स्थान बना लेते हैं।

सच तो यह है कि हम जैसा सोचते हैं जैसे कार्य करते हैं वैसी ही ऊर्जा हमारे भीतर निर्मित होकर हमारे ऑरा का निर्माण करती है।

यह ऊर्जा अपने समान दूसरी ऊर्जा के सम्पर्क में जब आती है तो वह व्यक्ति हमें विशेष आकर्षित करता है और हमारे मन का कोई कोना उससे जुड़ जाता है। न तो इसका लिंग से कोई सम्बन्ध है न  वाह्य सुंदरता से कोई लेना- देना  है। यह रिश्ता दो स्त्रियों के मध्य, दो पुरुषों के मध्य या फिर स्त्री-पुरुष के मध्य भी हो सकता है।

अगर आपके जीवन में एक भी ऐसा निःस्वार्थ सम्बन्ध है तो आप दुनिया के सबसे भाग्यशाली इंसानों में से एक हैं।

-मणि अग्रवाल “मणिका”, देहरादून , उत्तराखंड

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