देले ज्ञान गुरु दूर करे अज्ञान जीनगी संवर जाले।
मिले सम्मान शिष्य बने पहचान गरीबी उबर जाले।
सही करेले शिक्षक ठोक_ ठाक के ज्ञान हथौड़ी।
कुमति औरी कुरीति आदमी के बह भंवर जाले ।
मिले के चाही आदर सत्कार शिक्षक गुरु महान।
ऊंच आसान गुरु चरण कमल सिर नजर जाले।
गरिमा गिरे ना ख्याल गुरु के राख़ल जरूरी बा ।
जइसन रही गुरु के राह शिष्य डगर ओहर जाले।
राष्ट्र के मान बढ़ी जब शिक्षक के सम्मान मिली।
करेले भारती कर प्रणाम गुरु महिमा ऊपर जाले।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर) बोकारो, झारखंड