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गजल (भोजपुरी) – श्याम कुंवर भारती

देले ज्ञान गुरु दूर करे अज्ञान जीनगी संवर जाले।

मिले सम्मान शिष्य बने पहचान गरीबी उबर जाले।

 

सही करेले शिक्षक ठोक_ ठाक के ज्ञान हथौड़ी।

कुमति औरी कुरीति आदमी के बह  भंवर जाले ।

 

मिले के चाही आदर सत्कार शिक्षक गुरु महान।

ऊंच आसान गुरु चरण कमल सिर नजर जाले।

 

गरिमा गिरे ना ख्याल गुरु के राख़ल जरूरी बा ।

जइसन रही गुरु के राह शिष्य डगर ओहर जाले।

 

राष्ट्र के मान बढ़ी जब शिक्षक के सम्मान मिली।

करेले भारती कर प्रणाम गुरु महिमा ऊपर जाले।

– श्याम कुंवर भारती (राजभर) बोकारो, झारखंड

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