मनोरंजन

छंद – मणि अग्रवाल

खोज रही अति व्याकुल हो अपने प्रिय माधव को ब्रजरानी ।

श्याम सिवा कुछ याद नहीं सगरे जग से सुधि है अनजानी।

बोल रहा दृग नीर निरंजन ठीक नहीं इतनी मनमानी।

आन मिलो अब शीघ्र सखा मनुहार करे यह चूनर धानी।।

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द्वार-द्वार  गाती रहें, खुशियाँ मङ्गल गान,

सबके चेहरों पर रहे, उजली-सी मुस्कान,

करुणा उपजाती रहे, सब में सेवा भाव-

अन्तस् का उल्लास तब, होगा आयुष्मान।।

-मणि अग्रवाल”मणिका”, देहरादून उत्तराखंड

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