*वक्त का पहिया है जो रुकता ही नहीं!
वक्त एक पल के लिए ठहरता ही नहीं!!
ये रेत के जैसे है जो हाथों में संभालता ही नहीं!
एक इंसान ही है जो किसी को समझता ही नहीं!!
हाड़ मांस का तन है जो सदा अमर रहता ही नहीं!
*वक्त का पहिया है जो रुकता ही नहीं*
न जाने किस अभिमान और मद में चूर है!!
न जाने क्यों इतना खुदगर्ज और मगरुर है !
यहां कितने आए और चले गए!!
आज धरती पर इनका की वजूद नहीं !
वक्त का पहिया है जो रुकता ही नहीं !!
– राजेश कुमार झा, बीना, मध्य प्रदेश,फोन- 9329396076