कल जो याद हमको करते थे, अजनबी आज हो गए कैसे।
मिलने का शौक था हमसे उनको, वो आजीज हो गए कैसे।।
कल जो याद हमको करते थे——————-।।
खता क्या हमसे हुई है कि, वो दूर हमसे रहते हैं।
राह में मिल गए अगर तो, राह वो अपनी बदलते हैं।।
कल वो खुशी से मिलते थे, अब वो दुःखी हो गए कैसे।
कल जो याद हमको करते थे——————-।।
बनाते हैं आखिर क्यों रिश्तें, लोग यूँ अपने जीवन में।
बनाते हैं आखिर क्यों मकान, हम यूँ अपने जीवन में।।
हम तो नहीं थे उनके पराये, अब वो पराये हो गए कैसे।
कल जो याद हमको करते थे——————।।
मिल गया होगा उनको, हमसे ज्यादा दोस्त अच्छा।
हमसे हो पाता नहीं, शायद उनका हर ख्वाब सच्चा।।
क्या हुआ उनकी वफाओं का, अब वो खफा हो गए कैसे।
कल जो याद हमको करते थे——————।।
जज्बाते- दिल मेरा समझे नहीं, बेखबर वो ऐसे निकले।
कैसे कहे कि वो है हमारे, इतने संगदिल वो कैसे निकले।।
चाहते थे कल वो हमको बहुत, अब वो हमको भूल गए कैसे।
कल जो याद हमको करते थे——————-।।
– गुरुदीन वर्मा .आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)