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बेदर्द शहर – मीरा पाण्डेय

बेदर्द शहर था उनका .

….लोग बड़े सवाली थे .

…..बात शोहरत की करते

….और मोहब्बत से झोली खाली थे .

………….

मेरी आरजू थी उस शहर से गुजरूँ  .

रुक गए कदम मेरे .

उस बाजार मे इमानो .

की बोलती  लगते थे .

………….

चमक चेहरे के बताते थे .

…..जुबां तेज और जेब खाली हैं .

….उस बेवफा के शहर मे .

लोग बड़े सबाली थे .

………..

इसमे शायर ये समझा रहा .

…..तुम सब अंदर से मर चुके हो .

बात करते हो मोहब्बत की .

और आबरू पे नजर रखते हो .

– मीरा पाण्डेय उनमुक्त, नई ,दिल्ली

 

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