मुहब्बत मे मेरा सब तेरा हुआ है।
लगे आज दिल पर ज़फ़ा सा हुआ है।
युवा आज सबका सताया हुआ है।
नही काम मिलता,वो खोया हुआ है।
वही अब खड़ी हूँ जहाँ छोड़ा तुमने
न जाने कहाँ अब तू सोया हुआ है।
उदासी भरी है गये छोड़ जब से।
लगा जिंंदगी मे ये धोखा हुआ है।
है हम मुंतज़िर उनका संदेश आऐ।
कहे बात दिल की जो अपना हुआ है।
निभाऊं मैं कैसे ये रस्में मुहब्बत।
निभाना मुहब्बत भी सपना हुआ है।
उन्हें आज पूजा बड़ा,आज दिल से।
मगर वो न समझा,रूठा सा हुआ है।
है तेरी मुहब्बत इबादत है मेरी।
तुम्ही से मैने दिल लगाया हुआ है।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़