आदमी को धन और पैसा कमाना जितना मुश्किल है।
सच है आदमी को आदमी कमाना उतना ही मुश्किल है।
गंवाना है पैसा जितना आसान रिश्ता गंवाना भी आसान।
गया पैसा जल्दी आता नहीं रिश्ते जोड़ना भी मुश्किल है।
पाई पाई राई राई जोड़ जो बनाया धन का खजाना हमने।
बह जायेगा पानी की तरह रोक पाना और भी मुश्किल है।
खाना और खजाना रखते सात पर्दो में रिश्तों परवाह नहीं।
टूटे रिश्तों को फिर अपना बना पाना और भी मुश्किल है।
खून का रिश्ता ही होता नहीं अपना रिश्ते दिल के होते हैं।
गया जो रूठ दूर हमसे पास बुला पाना और भी मुश्किल है।
गवाया धन तो फिर कमा ले शायद हम जिंदगी में कभी।
जिदंगी अधूरी तेरे बिना जिंदा रह पाना और भी मुश्किल है।
भारती करता भाव किस बात का अनमोल रिश्तो बिना।
अपनों बिना मकान को घर बना पाना और भी मुश्किल है।
श्याम कुंवर भारती , बोकारो,झारखंड