भूखल बानी खर जितिया जितिया माई वर दिहा हो।
खाली मोर अंचरा इहे मोर अरजीया माई भर दिहा हो।
सुना सुना जीतवाहन बाबा लाज मोर अबकी राखा।
सुनी मोर गोदिया सुना बा अगनवा नजर हमरी ओर देखा।
बाँझिन के लगल बा लांछनवा जितिया माई हर लिहा हो।
जितिया माई वर दिहा हो।
जुग जुग जिए मोर ललनवा चहके मोर भवनवा न हो।
खेले गोदिया चार गो होरीलवा बिहांसे मोर नयनवा न हो।
पूरा होखे वरतिया माई पूरा मनसा जरूर करीहा हो।
जितिया माई वर दिहा हो।
संझीया के बेरा घाट हम नहाइब माई भोगवा हम चढ़ाईब न हो।
होत भिन्सरवा पारण हम लगाईब हाथ जोड़ी हम मनाईब न हो।
सौ साल जिए मोर होरीलवा जितिया माई हाथ वर सर दिहा हो।
जितिया माई वर दिहा हो।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड , मोव.9955509286