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जन्मदिन आए बार-बार – प्रदीप सहारे

 

धरती और गगन,

पवन होकर मस्त मगन,

बहती नदी किनारे,

पक्षीयों का कलरव,

ऊंचे पहाड़ो से गिरते,

झरनों का शोर,

गुनगुना रही है वसुंधरा ,

आए जन्मदिन बार-बार।

 

पुत्र हो तुम सरस्वती के,

लेखनी में समा हैं संसार,

प्रकट होता हैं कविताओं में,

रहें यह सदा बरकरार,

तारो सी चमको जग में,

करों रोशन सारा संसार,

आए जन्मदिन बार-बार।

 

कोयल सी है मिठी बोली,

कोई ना जाता द्वार से खाली,

सफलता पाँव पखारे सदा,

साथ रहें स्वास्थ संपदा,

मेरी मंग है यह दातार,

आए जन्मदिन बार-बार।

आ० विनोद जी

आए जन्मदिन बार-बार।

– शुभेच्छु- प्रदीप सहारे,

नागपुर, महाराष्ट्र

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