लग चुका खग्रास अपने देश को राजनीति का
फिर भी आशा कर रहे हम देश के उत्कर्ष की
रोज चालें चल रहा है ‘पाक’ भारत के खिलाफ
फिर भी बातें कर रहे हम दोनों के सम्पर्क की
लहू में डूबी यह दुनियाँ नरक का पैगाम है।
फिर भी करते कल्पना हम इस धरा पर स्वर्ग की
हर हृदय में राज्य रावण कर रहा है दोस्तों।
बात लेकिन कर रहे सब राम के आदर्श की।
– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश