इस जहाँ का अजब कारोबार देखा,
आदमी का हर तरफ भरमार देखा।
आदमी हीं आदमी को दे सहारा,
आदमी से आदमी का मार देखा।
आदमी करता सदा हीं बेवफाई
आदमी से आदमी का प्यार देखा।
इस जमीं पे आदमी करता गुजारा,
भूख का मारा सदा लाचार देखा।
देखतें हर आदमी करता तिजारत,
आदमी हीं आदमी का यार देखा।
आदमी ही आदमी को दे निवाला,
आदमी का आपसी तकरार देखा।
क्या गजब दुनिया बनाई ‘अनि’ खुदा नें,
आदमी का क्या गजब व्यौहार देखा।
– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड