( 1 )” स “, सत्य-सत्य है
सनातन अनंत..,
आदि चिंतन !!
( 2 )” ना “, नारायणीय
उपाख्यान संवाद..,
वेद वाङ्मय !!
( 3 )” त “, तत्त्वमसि हो
है मिथ्या जगत ये..,
ब्रह्म सत्य है !!
( 4 )” न “, न ये मेरा है
शाश्वत आत्मा यही..,
है सनातन !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान