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भोजपुरी कजरी लोक गीत – श्याम कुंवर भारती

लगाईके पीरीतीया ये प्रीतम जी,
जाइके दुबई भुलईला ये राम।
नेहिया क डोरी तोरी दिहला ये प्रीतम जी ।
सवतीया संग भुलइला ये राम।

सावन में पिया मोर जिया नाही लागेला।
सावन के बहार देखी हीया मोर फ़ाटेला।
केवन कसूर हमसे कोहइला ये प्रीतम जी।
जाइके दुबई भुलाइला ये राम।

सावन के फुहार आंचरा मोर भिंजेला।
अंखियां से झरी झरी कजरा मोर बहेला ।
नयनवा के धार डूबवला ये प्रीतम जी।
जाइके दुबई भूलइला ये राम।

जब जब अकसवा में चमकेले बिजुरिया।
चिहुंकी जागी गोरिया उठेली सेजरिया।
हमके जियते मुअवला ये प्रीतम जी।
जाईके दुबई भुलाइला ये राम।

काहे भारती पिया हमसे नयना लड़वला।
नेहिया के झुलवा में हमके झूलवला।
झूठ साँच बतिया भरमवला ये प्रीतम जी।
जाइके दुबई भुलइला ये राम।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो, झारखंड , मॉब.9955509286

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