( 1 ) सुनें
अपनों की व्यथा कथाएं ..,
और दूर करें इनकी समस्याएं !!
( 2 ) चलें
अपनों का मन बहलाएं…,
और पास बैठ, तकलीफें मिटाएं !!
( 3 ) कहें
अपनों से मनोभावनाएं…,
और सारी चिंताओं से मुक्ति पाएं !!
( 4 ) समझें
अपनों की दुःख-दर्द चिंताएं…,
और समयानुकूल मरहम लगाएं !!
( 5 ) हरें
अपनों की सारी विपदाएं…,
और सत्मार्ग की ओर इन्हें बढ़ाएं !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान