हियवा में उठे बड़ा हुक हो,
वृंदावन भूल गइला सवरू।
भइल हमसे केवन चूक हो,
वृंदावन भूल गइला सवरु।
ओही वृंदावनवा कान्हा बंसिया बजवला।
कदमवा के डलिया पर झुलवा झूलवला।
तोहरे बिना सावन देला बड़ा दुख हो।
वृंदावन भूल गइला ………..।
यमुना किनारे राधा गगरी भरेली।
श्याम पिया प्यार छमकत चलेली।
हियवा जरावे वैरी कोइली कुक हो।
वृंदावन भूल गइला……..।
सावन के झकोरा तन मोरा भिंजेला।
मातल पवनवा आंचरा मोरा खींचेला।
निर्मोही पिया भावे ना हमके धूप हो।
वृंदावन भूल गईला सवरू ।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो,झारखंड