मैं तो चला अब अपने, सभी मुकाम छोड़कर।
धन-दौलत, रिश्ते-नाते, और यह मकान छोड़कर।।
मैं तो चला अब अपने——————–।।
हजारों तमन्नाएं दिल में थी, बाकी अभी।
चमन में बहार लानी थी मुझको, अभी बाकी।।
मुझे माफ़ करना, यह काम मैं कर नहीं सका।
मैं तो चला अब अधूरे, अपने ये काम छोड़कर।।
मैं तो चला अब अपने——————-।।
लहू और पसीना बहाकर, यह महल बनाया था।
दिल से लुटाकर प्यार, यह ताज सजाया था।।
दिल को करो नहीं मायूस, मेरे दिल-अजीजों तुम।
मैं जा रहा हूँ तुम्हारे लिए, यह सामान छोड़कर।।
मैं तो चला अब अपने——————-।।
मत करना यह अहम तुम, वहम यह करकै।
वजूद तुम्हारा रहेगा यहाँ, अमिट काया बनकै।।
मत करना तुम जुल्म और पाप, इस शान के लिए।
जाना है सबको एक दिन, ऐसे एक शाम बनकर।।
मैं तो चला अब अपने———————-।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद, तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)