मनोरंजन

मैं और मेरा चांद – रेखा मित्तल

 

मैं और मेरा चांद

अक्सर बातें  किया करते है।

बैठकर साथ चांदनी रातों में

खुशियां बांट लिया करते हैं

गमों को सिरहाने रख

अश्कों से हृदय भिगोते  हैं

एक दूसरे का थामकर दामन

हंसते हैं  गीत गुनगुनाते हैं

तुम्हारे साथ जुड़ी जीवन की

कितनी मधुमय घड़ियां है

मैं और मेरा चांद

अक्सर बातें किया करते हैं!!

क्या हुआ छाए हैं

गम के बादल आज

यह भी उड़ जाएंगे जब

तुम चमकोंगे अपनी

पूरी कलाओं के साथ

रोशनी होगी चहुं ओर

नीले अंबर के शत् दल पर

मैं बैठी शरद हंसिनी सी

शांत ,कोमल चितवन सी

बह निकली नैनों से

सहसा जल की धारा है

मौन में डूबी आज निशा है

मूक हुई आज हर दिशा है

मैं और मेरा चांद

अक्सर बातें किया करते हैं!!

निशब्द सी हो गई हूं

अश्कों ने सब कह दिया

शरद चांदनी की छांव  तले

आओ  कुछ देर साथ चलें

चांद का अद्भुत सौंदर्य

आंखों में सिमट आया है

तुम्हारा प्यार बनकर चांद

मेरे मन में उतर आया है

सुनहरी यादों को तुम्हारी

पलकों की झालर में समेटे हुए

मैं और मेरा चांद

अक्सर बातें किया करते हैं!!

✍️रेखा मित्तल, चंडीगढ़

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