मनोरंजन

जिंदगी हम नहीं – अनिरुद्ध कुमार

 

जख्म देके कहें मजहबी हम नहीं,

दे दगा बोलते अजनबी हम नहीं।

 

पाठ उलटा पढ़ाके छुपे हो कहाँ,

झूठ बोलें कहें नफरती हम नहीं।

 

दिल जलाते हमेशा करें दुश्मनी,

बोलते हर घड़ी की छली हम नहीं।

 

चाल जो भी चलो मानतें हम दगा,

मान तेरा करेंगे कभी हम नहीं।

 

जो करोगो भरोगे मिलेगी सजा,

बीर नारी यहाँ बोलतीं हम नहीं।

 

वार उलटा पड़ेगा जरा सोंचना,

माफ करदें तुम्हें आदमी हम नहीं।

 

प्यार की ये जमीं जान देते सभी,

माँग लेना दुआ जिंदगी हम नहीं।

– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

Related posts

कहानिका कवि सम्मेलन रांची झारखंड में हुआ संपन्न

newsadmin

हर्षोल्लास के साथ मनाया विश्वकर्मा जन्मोत्सव

newsadmin

हद करते हो तुम – अनुराधा पांडेय

newsadmin

Leave a Comment