( 1 ) पिता
का साया, ही काफी है
जिंदगी में, बेटे के लिए !!
( 2 ) पिता
तपते सूरज से भी,
ले सकता लोहा, पुत्र के लिए !!
( 3 ) पिता
स्याह रात में भी,
चले जगमगाता, चाँद की तरह !!
( 4 ) पिता
बदलता है करवटें भी,
तो, पुत्र के सुंदर भविष्य के लिए !!
( 5 ) पिता
है जहाँ वहीं खुशियाँ हैं,
चले पुत्र बेफिक्री में यहाँ जीए !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान