अब कहाँ दिखते हैं जग मे वो दिवाने प्यार के,
मर मिटे जो आशिकी मे,गीत गाने प्यार के। ..
खोलकर देखे थे कल फिर खत पुराने यार के,
हाथ लेकर आज देखे वो पैमाने प्यार के।
खूबसूरत फूल खिलते बाग मे महके हुऐ,
अब बगीचे यार पहुँचा फूल लाने प्यार के।
पास होकर दूर कितने हो गये मेरे सनम,
क्या खता मुझसे हुई थी जो दे ताने प्यार के।
मुफलिसी मे हम जिये थे भूल बैठे आशिकी,
अब हकीकत मे लगे किस्से छुपाने प्यार के।
आ बिठा लूँ आज दिल मे फिर करूँ पूजा तेरी,
शेष जीवन साथ तेरे अब बिताने प्यार के।
घिर गयी है आज रीता दर्द के आजाबो मे,
रात भर रोयी वो सोचे,अब बहाने प्यार के।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़