मनोरंजन

कह के रहेंगे – सुनील गुप्ता

 

अंततोगत्वा

समझौता ट्रेड का,

दोनों में हुआ !!1!!

 

पहले फूले

एक दूजे पे थोपे,

स्वयं ही फूटे !!2!!

 

ये खींचतान

चली कुछेक दिन,

हाँकी थी डींग  !!3!!

 

मिलाए हाथ

करते क्या बेचारे,

अंत में हारे !!4!!!

 

आखिरकार

दोनों बुद्धू लौट के,

घर को आए  !!5!!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

Related posts

किताब के पन्ने – भूपेश प्रताप सिंह

newsadmin

ग़ज़ल हिंदी – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

newsadmin

Leave a Comment