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ढह गया चौथा स्तंभ – हरी राम यादव

ढह गया प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ,

देख चाटुकारिता सारा विश्व दंग।

सच्चाई से न कुछ लेना देना,

चढ़ा सत्य पर बेशर्मी का रंग।

 

कभी खड़ा होता पीड़ित के साथ,

पकड़ता पीड़ित का हिलता हाथ।

सहलाता उसका कांपता माथ ,

बनता शोषित का अदृश्य नाथ ।

 

चढ़ी सत्य की भावना भेंट ,

विश्वास हो गया मटियामेट।

दलाली में व्यस्त हैं पहरेदार,

सब लगे गरम करने में टेंट।

 

अब आस टूटी विश्वास टूटा ,

टूट गया सदियों का संबंध।

देख चौथे स्तंभ की चाल को,

जनमानस रो रहा होकर दंग ।।

– हरी राम यादव , अयोध्या , उत्तर प्रदेश

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