मनोरंजन

मेरी परिभाषा – रश्मि मृदुलिका

आश्चर्य से देखता है आवारा बादल,

कैसे बदल गई बूदों की फितरत,

वो बारिश नहीं थी, तुम्हारा भ्रम था,

वो मिट्टी की सोंधी सी खुशबू थी।

अनछुई, अनदेखी अहसास सी,

बारिश की बूदें उसकी पलकों से,

मानो बरस कर थक गई थी।

अब वारि की बूदें उसकी पलकों से नहीं,

उसकी उन्मुक्त हंसी में बरसती है।

– रश्मि मृदुलिका, देहरादून , उत्तराखंड

Related posts

विवाह वर्षगांठ – सुनील गुप्ता

newsadmin

अविस्मरणीय गीत ज्योति कलश छलके के रचनाकार पं. नरेंद्र शर्मा – डॉ.मुकेश कबीर

newsadmin

हिंदी हैं हम – डा० क्षमा कौशिक

newsadmin

Leave a Comment