मनोरंजन

अधूरापन – सविता सिंह

बना ली है जब हमने दूरी,

फिर आड़े ना आए मजबूरी।

 

सामने ना वह आए कभी,

चाहे कितनी भी रहे जरूरी।

 

सम्पूर्णता यानि फिर ठहराव,

भाये मुझको रहूं अधूरी।

 

ललक रहे हमेशा कायम,

चाह नहीं हो जाए पूरी।

 

नदी सी ही प्रवाह रहे,

मंजूर नहीं हो जाऊं खारी।

– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

Related posts

वीर दिवस – रेखा मित्तल

newsadmin

बेटे होने लगें घर से दूर – रूबी गुप्ता

newsadmin

मैं – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment