मनोरंजन

मंजिल – मधु शुक्ला

लगन, हौंसला, श्रम जब मिलते, मंजिल दूर नहीं रहती,

बाधाओं का डर न सताये, साथी जब आशा बनती।

 

कदम नहीं पीछे रखते जो, लक्ष्य न उनसे दूर रहे,

कंटक पथ के राह दिखाते, स्वागत जीत सदा करती।

 

धन, साधन, अरि, बौने लगते, जब उद्देश्य नजर में हो,

साथ तजे जग सारा लेकिन, प्रीत न चाहत से घटती।

 

जाने मन यह बात सभी का, रिपु होता आलस्य बड़ा,

कर्म योग को जो अपनाता, मंजिल उसको ही मिलती।

 

जीवन पथ पर काँटे ज्यादा, सुमन बहुत कम मिलते हैं,

याद रखा जो मान उसी का, उसकी करनी रखती है।

–  मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

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