मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

जज्बात उठे दिल मे, हम यार तुम्हारे हैं।

मचले हैं बडे अरमा,देखूँ जो ऩज़ारे हैं।

 

मकबूल भले जग मे, दिल से तो तुम्हारे हैं।

दिल हार लिया तुम पर,किस्मत से तो हारे हैं।।

 

क्या यार कहे तुमसे, उल्फत के ही मारें हैं।

उन शोख निगाहों में जलते से शरारे है।

 

बैखोफ दिखे नारी यारा इस दुनिया मे।

हिम्मत से भरी नारी अपनो से वो हारे है।

 

सीमा पे डटे सैनिक, तैयार शहादत को।

रखते हैं बड़ा जज्बा, आँखो मे,अँगारे हैं।

 

घर आज खिला मेरा, बेटी तेरे आने से।

बिटिया को दिये हैं पँख,मजबूत सहारें हैं।

 

बैठे हैं खुदा तेरी चौखट पे दुआ लेकर।

सज़दे की दुआ लेकर आमीन मे सारे हैं।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़

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