मनोरंजन

गीत – झरना माथुर

घिर आयी सावन की बदरिया,

काली-काली कजरारी बदरिया।

 

साजन तो है परदेस में मेरे,

बिन साजन के असुवँन घेरे,

भावे ना मोहे तेरी नगरिया,

घिर आयी सावन की बदरिया।

 

चूड़ी खनके, गजरा महके,

हाथों की मेहंदी भी दमके,

पांव की रुठी मोरी पायलिया,

घिर आयी सावन की बदरिया।

– झरना माथुर, देहरादून, उत्तराखंड

Related posts

भोजपुरी छठ गीत – श्याम कुंवर भारती

newsadmin

गजल – ऋतु गुलाटी

newsadmin

पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी भारतीय कलाकार को विदेशी गाने में अपने म्यूजिक के लिए क्रेडिट और रॉयल्टी मिली है: मिथुन

newsadmin

Leave a Comment