मज़हबी घातक बहुत बीमारियाँ इस मुल्क में,
आदमीयत चीरती कुछ आरियाँ इस मुल्क में ।
जाति आधारित बनी कुछ क्यारियाँ इस मुल्क में,
द्वेष के जल से उगी तरकारियाँ इस मुल्क में ।
सिर्फ बातें एकता की हैं दिखावे के लिए ,
देख लो गृह युद्ध सी तैयारियाँ इस मुल्क में ।
भीड़ पर पत्थर चलाना आम बातें हो रही ,
हर गली हर मोड़ पर मक्कारियाँ इस मुल्क में ।
माल खाना भारती का गीत गाने गैर के ,
कुछ पड़ौसी घाट की पनिहारियाँ इस मुल्क में ।
राष्ट्र यदि निरपेक्ष है तो पर्सनल लॉ बोर्ड क्यों ,
हिंदुओं के साथ यह अय्यारियाँ इस मुल्क में ।
माफियों को मज़हबी पोशाक देती पार्टियां ,
कुछ जमातें कर रहीं गद्दारियाँ इस मुल्क में ।
रोग का उपचार करना काम है सरकार का ,
क्या कहें कानून की लाचारियाँ इस मुल्क में ।
नाम “हलधर” का रहेगा बाग़ियों की सूची में ,
सत्य कहने में बहुत दुस्वारियाँ इस मुल्क में ।
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून