मनोरंजन

उड़ान – राजीव डोगरा

सुन मेरे मन के परिंदे

आगे ही तू बढ़ता चल।

न सोच तू इन राहों का

बस आगे ही निकलता चल।

न सोच तू राहगीरों का

वो भी खुद पंथ पे मिल जाएंगे।

न सोच तू इन हवाओं का

ये भी एक दिन बह जाएंगी।

न सोच तू इन तूफानों का

ये भी एक दिन थम जाएंगे।

न सोच तू इस अंनत व्योम को

इसको भी एक दिन तुम छू जाओगे।

न डर तू अनजान राहों से

ये भी एक दिन परिचित हो जाएंगे।

सुन मेरे मन के परिंदे

बस तू आगे बढ़ता चल

अपनी उड़ान यूँ ही तू भरता चल।

– राजीव डोगरा, गांव जनयानकड़

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश फोन – 9876777233

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