मनोरंजन

भोजपुरी पूर्णिका (जी जर गइल) – श्याम कुंवर भारती

दर्द देवे वाली सुनीला, हमार प्यार से जी जर गइल।

जिंदा हई मगर मानिला, आशिक तोहार अब मर गइल।

 

चैन आवे ना दिन में कही, रात नींद भी ना आवे कबो।

हमरे आंख आंसू से देखा,सगरो बाढ़ बह भर गइल।

 

कइली तोहसे मोहब्बत त का गुनाह हो गइल हमसे।

चढ़ा दा फांसी तु हमके मगर,लोग कही आशिक गुजर गइल।

 

जबले देखी ना तोहके सब सुना दुनिया बेगाना लगे ,

जोहत तोहके आज ले मगर,सुख पानी नजर गइल।

हमार प्यार से जी भर गइल।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखण्ड

Related posts

बरवै छंद – मधु शुक्ला

newsadmin

प्रसिद्ध दिव्यांग साहित्यकार सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को काम आया आत्म विश्वास – डॉ.सत्यवान सौरभ

newsadmin

लउटि चली बचपन मा – सन्तोषी दीक्षित

newsadmin

Leave a Comment