मनोरंजन

गज़ल – विनोद शर्मा

अभी भी है आंसू सूखी  हुई आँखों में,

निकलते नहीं क्योंकि तुम हो #आहों में।

 

जिंदगी में उनकी छवि पथराई निगाहों में,

वादों की जरुरत ही नहीं तुम हो #इरादों में।

 

दिन रात यादों में तुम साथ ही रहती हो,

जैसे चाँद, सूरज और तुम हो #सितारों में।

 

तारों को भी है पता कहाँ रहती तुम हो,

जिंदगी में छुपे रहे हमसे तुम जो #परदों में।

 

जिंदगी में ऐसा सितम सनम मुझ पर न करें,

भूलने को हमें ना ही कहे तुम हो #यादों में।

 

जिंदगी में यादों का सहारा सिर्फ रह गया,

जिंदगी में सनम देखूं तुम को #ख़्वाबों में।

– विनोद शर्मा विश,  दिल्ली

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