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गजल – मधु शुक्ला

सदा पक्ष में ही लहू बोलता है,

करे खिलाफत उसे डांटता है।

 

करे हरकतें कष्टदायी पड़ोसी,

रहे चुप न भाई उसे फोड़ता है।

 

सुरक्षित रखें घर सभी लोग मिलके,

अमन, चैन होता नहीं लापता है।

 

रहें पास या दूर टूटें न रिश्ते,

मिलन से घरों में सुकूं राजता है।

 

न ‘मधु’ प्रेम को त्याग धन को कमाना,

पराया न जज्वात को जानता है।

— मधु शुक्ला .सतना, मध्यप्रदेश .

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