Category : विदेश

विदेश

युद्धोन्माद से कैसा शांति सन्देश – डॉ. सुधाकर आशावादी

newsadmin
neerajtimes.com – युद्ध किसी भी समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकता। इतिहास साक्षी है कि युद्ध केवल तबाही का अध्याय लिखते हैं सृजन का...
विदेश

विश्वयुद्ध की दहलीज पर दुनिया, भारत के लिए अग्नि परीक्षा का समय – ओंकारेश्वर पांडेय

newsadmin
neerajtimes.com – इतिहास के पन्ने गवाह हैं कि जब कूटनीति की मेज से आवाजें कम और आकाश में विमानों की गड़गड़ाहट ज्यादा होने लगे, तो समझ...
विदेश

अमेरिका पर कर्ज़ का पहाड़, फिर भी डॉलर का जलवा बरकरार – विवेक रंजन श्रीवास्तव

newsadmin
neerajtimes.com – अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज़दार देश है, लेकिन उसी की मुद्रा डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत और सबसे प्रभावशाली करेंसी बनी...
विदेश

क्या होगा बांग्लादेश का भविष्य – शिवशरण त्रिपाठी

newsadmin
neerajtimes.com – गत जुलाई में बाग्लादेश की तत्कालीन शेख हसीना सरकार को जिस तरह पाकिस्तान की शह पर कट्टरपंथियों द्वारा उखाड़ फेंका गया और उनके...
विदेश

नेपाल में कविता बिष्ट ‘नेह’ को मिला नेपाल–भारत साहित्य गौरव सम्मान

newsadmin
neerajtimes.com महेंद्रनगर (नेपाल) – नेपाल मानसखण्ड गुरुकुल के सौजन्य से महेंद्रनगर, कंचनपुर में मानसखण्ड लोक संस्कृति सम्मेलन एवं लिटिल बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी का भव्य...
विदेश

‘आचार्यकुल’ का अंतर्राष्ट्रीय समागम: विनोबा विचारों पर होगा विचार-मंथन

newsadmin
neerajtimes.com बोधगया / रायबरेली। ज्ञान और मोक्ष की पवित्र भूमि बोधगया एक महत्वपूर्ण वैचारिक मंथन का केंद्र बनने जा रहा है। आचार्यकुल का तीन दिवसीय...
विदेश

भूटान-भारत साहित्य महोत्सव में डॉ.जसप्रीत फ़लक थिम्फू में हुई सम्मानित

newsadmin
  neerajtimes.com थिम्फू – भूटान की राजधानी थिम्फू में हिंदी दिवस के अवसर पर “भूटान-भारत साहित्य महोत्सव” का भव्य आयोजन क्रांतिधरा साहित्य अकादमी के तत्वावधान...
विदेश

विश्व धर्म संसद में ईसाई मिशनरियों को खुलेआम ललकारा था स्वामी विवेकानंद ने- अतिवीर जैन “पराग” 

newsadmin
neerajtimes.com -“अमेरिका निवासी मेरे प्यारे बहनों और भाइयों, “11 सितंबर 1893 को,विश्व धर्म संसद में जैसे ही स्वामी जी ने इस उद्बोधन के साथ अपना...
विदेश

वर्तमान युद्ध परिदृश्य में शांति की अवधारणा – विवेक रंजन श्रीवास्तव

newsadmin
  neerajtimes.com – शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात् एक नए शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के उदय की आशा थी। परन्तु इक्कीसवीं सदी के इस  तीसरे...