मनोरंजन

हम रहेंगे नहीं- प्रमोद नारायण

मै झुकता रहा अब झुकेंगे नही,
मैं बहुत कह चुका अब कहेंगे नहीं।
आज तक तुम मुझको समझ न सकी,
जब समझोगी तुम हम रहेंगे नहीं।

तेरी यादों की घेरे से निकला,
अभी पागल दीवाना मुझे कहते सभी।
तुम लिखती रहो स्वयं पढ़ती रहो,
तुम कुछ भी लिखो हम पढ़ेंगे नहीं।

जब तुमसे मिला भावना में बहा,
कटु शब्दों को भी मैंने हंसकर सहा।
तुम नफरत करो जी भरकर करो,
हम तुमसे शिकायत करेंगे नहीं।

गम का बादल तुम पर ना छाए कभी,
प्रतिभा को तेरी सराहे सभी।
सौगात मौत का मेरी तुमको मिले,
बददुआ भूलकर तुमको देंगे नहीं।
– प्रमोद नारायण मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/साहित्यकार/गीतकार
मुजफ्फरपुर-बिहार

Related posts

प्रेरणा हिन्दी प्रचार सभा के तत्वावधान में राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी आयोजित – कवि अशोक

newsadmin

स्मार्ट प्लास्टिक – डॉ. सत्यवान सौरभ

newsadmin

आधुनिकता (कविता) – ज्योती कुमारी

newsadmin

Leave a Comment