1-चिंतन में दिखता नहीं ,कवियों के ठहराव ।
लुप्त हुई संवेदना, मन में कटुता भाव।।
2- सैफ करीना देख लो ,कितने हैं मगरूर ।
बेटे को शैतान का ,नाम दिया तैमूर ।।
3- आज हिंद के सामने, प्रश्न खड़े विकराल ।
मज़हब के उन्माद में, होता रोज बवाल ।।
4- दशकों तक देते रहे ,संविधान को घाव ।
खाते हैं सौगंध वो ,करना हमें बचाव ।।
5- आतंकों के मूल में , इस्लामी आयाम ।
मानवता को खा रहे , तर्क रहित पैगाम ।।
6- रोगी जड़ सूखा तना, शुष्क हुई है छाल ।
मज़हब की दीमक लगी , दुनिया का वो हाल ।।
7- अपराधी नेता हुए, नैतिकता है लुप्त ।
संसद दिखती मौन है , न्यायालय भी सुप्त ।।
8- भाई चारे का यहां,बदल रहा आधार ।
शोणित से छपने लगे, दुनिया में अख़बार ।।
9- क्या इसका आरंभ है ,क्या है इसका अंत ।
ओर छोर मिलता नहीं, माया ईश अनंत ।।
10- नंगापन होने लगा,दुनिया में मशहूर।
आंखों का पर्दा फटा , दर्पण चकनाचूर ।।
11- भाषा युग संजीवनी , भाषा काल चरित्र ।
खिंचते हैं साहित्य में , शब्द ब्रह्म के चित्र ।।
जसवीर सिंह हलधर , देहरादून