मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

दर्द मे पहुंचा वो मधुशाला नही।

बिन पिये जाना कोई हाला नही।

 

रात दिन तड़पा बेचारा दर्द मे,

हाल कोई पूछने वाला नही।

 

पाँव रगड़ा जो नही दिन रात मे,

उसकी किस्मत का खुला ताला नही।

 

आज देखी भी कहाँ छोरी कोई,

बात कर दो चार पर बाला नही।

 

मन को मेरे भा गयी सुंदर कली,

रंग उसका देख लूँ काला नही।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़

Related posts

हार तो जीत की बुनियाद है – सुनील गुप्ता

newsadmin

स्वर साधिका शारदा सिन्हा के सुमधुर संगीत के हमसफर, सशक्त साथी को अंतिम सलाम (ओंकारेश्वर पांडेय-विभूति फीचर्स)

newsadmin

ना कल था, ना कल रहूंगा – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment