चरखा चलता हाथ से, आत्मा का है गान,
गांधी बोले सुनो सभी, यही है स्वाभिमान।
विदेशी वस्त्र त्याग दो, पहनो खादी भेस,
अपने हाथ से बुनो तो, आत्मनिर्भर देश।
भीख नहीं, श्रम ही बड़ा, गांधी का उपदेश,
अपने पैरों पर खड़ा हो, तभी बनेगा देश।
सुई धागा हल कुदाल, सबमें बसता राम,
आत्मनिर्भर जो बने, उसका ऊँचा नाम।
चरखे की हर घूम में, छिपा है स्वतंत्रता का मंत्र,
गांधी का सपना यही, भारत हो आत्मतंत्र।
घर घर हो मशरूम उत्पादन
आज के समय में आत्मनिर्भरता के लिए उपयुक्त है यह
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना, बिहार