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विष कन्याओं का चक्रव्यूह (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी

neerajtimes.com – आदमी या तो बडबोलेपन में मारा जाता है या किसी विषकन्या पर विश्वास करके। विषकन्या की जहरीली आँखों के नशे में डूबने वाले कब विषकन्या का शिकार बनकर जेल खाने में पहुंच जाएं, यह पूर्व निर्धारित नहीं होता।
आजकल प्रचार का युग है। कानून की बात भी बेमानी है। नाबालिग होने के अपने फायदे हैं और बालिग़ होने के अलग नुकसान। किसी जघन्य काण्ड में एक आरोपी को सजा में भी छूट मिली और किसी मानवता के पुजारी ने अपराध करने का पुरुस्कार भी प्रदान किया। किसी ने किसी दिशानायक की मौत से पहले ही तेरहवीं करके समोसों की दावत दी, तो उसकी दावत में उस जैसे ही अनेक शरीक हो गए। उस नाबालिग पर समोसे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आए, किसी ने नहीं पूछा, अलबत्ता समोसे की दावत हुई और दावत देने वाली का सम्मान भी हुआ।
दुनिया में सम्मान ऐसे ही लोगों का होता है, जो लीक से हटकर कार्य करते हैं, मसलन किसी एक धर्म के अनुयायियों की आस्था का मजाक उड़ाते हैं। इस मजाक उड़ाने वाले में उसकी कमाई पर मौज उड़ाने वाले उसके परिजन भी साथ निभाते हैं। बहरहाल रहिमन इस संसार में भांति भांति के लोग। जब किसी को खुली बकवास करने पर, सार्वजनिक रूप से अभद्र गालियां देने पर सम्मान मिलने लगे, तो वह शालीन और सभ्य भाषा का प्रयोग क्यों करें, असभ्य और अश्लीलता भरी गालियों का प्रयोग क्यों न करे। प्रचार मिले चाहे जैसे भी मिले। अश्लील भाव भंगिमाएं प्रस्तुत करके मिले या माँ बहन की गालियाँ देकर।
सस्ता प्रचार पाने के लिए कुछ लोग बडबोलेपन में इतने लिप्त हो जाते हैं, कि भूल जाते हैं, कि किसी विषकन्या के उकसावे में आकर या उसकी नशीली बातों के प्रभाव में आकर ऐसी ऐसी बकवास कर रहे हैं, जिनका सत्य से कोई सरोकार नहीं है। विष कन्याएं इसी फिराक में रहती हैं, कि जैसे भी हो, सामने वाले को अपने मोहजाल में फंसाओ और अपना स्वार्थ पूरा करके सामने वाले से अपना स्वार्थ पूरा करो। आदिकाल से ऐसा ही होता आया है, कि व्यक्ति को उसके बडबोलेपन ने ही बुरा फंसवाया है।
दिल्ली के जंतर मंतर के किस्से हों या अन्य स्थलों पर किसी यूट्यूब चैनल द्वारा पॉडकास्ट के नाम पर किसी बड़बोले को फंसाने का खेल चक्रव्यूह हर जगह रचे जा रहे हैं। एक बारगी अभिमन्यु चक्रव्यूह के सातवें द्वार तक पुरुष योद्धाओं से तो मुकाबला कर सकता है, मगर यदि चक्रव्यूह की रचना विष कन्याओं द्वारा की जाए, तो ऐसे चक्रव्यूह को ध्वस्त कर पाना सामान्य व सस्ती लोकप्रियता के चहेतों के लिए मुश्किल होता ही है। ((विनायक फीचर्स)

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