मनोरंजन

राखी – रीता गुलाटी

 

अहसासों से गूँथे प्यारें धागें हैं।

भाई-बहन कें ये अनमोल वादे हैं।

 

बचपन का  होता झगड़ा था मीठा।

यादो में घुलते सपने वो सारे हैं।

 

राहें होती भले जुदा कुछ कारण से।

रिश्ते दिल के लगते आधे आधे हैं।

 

रहे सलामत मेरा भाई वो कहती।

बहना की आँखे अब माँग दुआएं हैं।

 

राखी बाँधे बहना  खिल उठता बचपन

आँगन में लौटे दिन वही पुराने हैं।

— रीता गुलाटी ‘ऋतंभरा’ चण्डीगढ़

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