खड़ा हिमालय है उत्तर में दुश्मन न कोई कभी इस पार करे।
लहराता है सागर दक्षिण में लहरों से न कोई तकरार करे।
बहती है नदियाँ गंगा और यमुना पाप नासीनी भारत में मेरे।
जीवन दायिनी पवित्र पावनी इससे नहीं कोई इनकार करे।
गांधी सुभाष टैगोर तिलक नाम अमर भगत आजाद का ।
राणा लक्ष्मी बाई पृथ्वी की तलवार समर भूमि झंकार करे।
कितना गिनाऊं कितना सुनाऊँ बीर गाथा राष्ट्र सपूतों का।
मजाल नहीं दुश्मन कोई सुन हुंकार रण में पलटवार करे।
दिखाया जौहर नारियों ने पकड़ कटार चूड़ियों वाले हाथों में।
मचाई खलबली मुगलों अंग्रेजों में भाग कायर हाहाकार करे।
महात्मा बुद्ध महावीर श्रीराम कृष्ण नानक कबीर का भारत है।
कही मंदिर में घंटा घड़ियाल कही मस्जिद में अजान पुकार करे।
महान भारत महान सदा रहेगा रुका नं झुका आगे सदा रहेगा।
जमीन आसमाँ जल में दुनिया भारत की जय जयकार करे।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो,झारखंड , मॉब.9955509286,