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देश का विश्वास – डॉ. प्रियंका सौरभ

भारत माँ की पीर का, किसको है अब ख्याल।
देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥

सत्ता इनके हाथ से, फिसली जिस दिन आज।
मिलकर फिर से ढूँढ़ते, छल-कपटों का राज।
धरना, नारे, शोर से, करते रोज़ बवाल—
भारत माँ को हो रहा, इसका बहुत मलाल।
देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥

धरना देकर ढूँढ़ते, फिर सत्ता की राह।
जनता से ज़्यादा उन्हें, कुर्सी की है चाह॥
जनता देखे मौन हो, कैसा यह जंजाल—
भारत माँ को हो रहा, इसका बहुत मलाल।
देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥

लिए विदेशी धन सदा, करते जो अभियान।
उनसे पूछे देश अब, क्या यह है सम्मान?
हर जनमन के सामने, खड़ा यही सवाल—
भारत माँ को हो रहा, इसका बहुत मलाल।
देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥

भारत होगा एक दिन, फिर से अति खुशहाल।
सद्भावों की जल उठे, घर-घर नई मशाल।
देश बड़ा हर धर्म से, ऊँचा इसका भाल—
स्वार्थ नहीं, सद्भाव से, मिलते हैं सुरताल॥

– डॉ. प्रियंका सौरभ, 333, परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045,

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