मनोरंजन

ढूँढ़ो – प्रदीप सहारे

फिल्म का गाना,
जमाना था दीवाना।
“ढूँढ़ो, ढूँढ़ो रे साजना,
मेरे कान का बाला।”
साजना भी था मतवाला,
लाता था ढूँढ़कर बाला।
सजनी भी पहनती,
अपने कान में बाला।
अब सजना बना,
बीएलओ वाला।
ढूँढ़ रहे हैं उसे बच्चे,
साथ में स्कूल वाला।
ढूँढ़ रहा है,
बच्चों के माँ-बाप को,
सजना बीएलओ वाला।
माँ-बाप ढूँढ़ रहे हैं,
मेरे बाप ने २००२ में,
वोट कहाँ पर डाला।
सब तरफ चल रहा,
हर दिन यह झमेला।
जिसने लगाया यह झमेला,
वह है मस्त-मौला,
देश का रखवाला।
विदेश घूम रहा,
लेकर एक झोला।
उसे नहीं कोई ढूँढ़ने वाला।
ढूँढ़ो, ढूँढ़ो रे साजना…
देश का रखवाला…।
✍️ प्रदीप सहारे, नागपुर , महाराष्ट्र

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