खुश हो कि मैं तेरा पागल दीवाना लगता हूं।
कह दो कि मैं तेरा आशिक पुराना लगता हूं।
मेरे हाल पे मुस्कुराते हो अच्छा नहीं करते हो।
खैर खुदा की मै तेरा प्यारा नजराना लगता हूं।
दिल लगाया नहीं हाल ए दिल तुम क्या जानोगे।
दिल मेरे तू ही तू मै आशिक मस्ताना लगता हूं।
मुझसे दिल लगाकर और भी खिल जाओगे तुम।
तुझपे मै मर जाऊं ऐसा शमा परवाना लगता हूं।
जबसे मिला तू मुझे लोग दाद देते हैं तेरे हुस्न की।
भारती दिल लगाओ मै सच्चा दोस्ताना लगता हूं।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286