मनोरंजन

सावित्री वट पूजा – डॉ अनमोल कुमार

बरगद की छांव तले,
सिंदूरी थाल सजा है।
कच्चे सूत का धागा ले,
हर सुहागिन का मन बसा है।।

पीले चावल, भीगे चने,
रोली-फूल और दीप जले।
सावित्री सी बन जाऊं मैं,
हर जनम पिया संग पले।।

वट वृक्ष तू साक्षी रहना,
सात फेरों का वचन निभाऊं।
धागा बांधूं तीन लोक का,
मैं सुहाग अमर कर जाऊं।।

यम से जो जीत गई पति को,
उस सती का तेज समेटे।
भीगी पलकों, जुड़े हाथों,
आज हर मन वही कहानी मेटे।।

नहीं मांगती महल-दुमहल,
बस मांगूं उम्र पिया की।
वट के पत्ते जितने हरियर,
उतनी उम्र हो जिया की।।

सुनो बरगद बाबा मेरी,
सूत में बांधूं प्रीत पुरानी।
जब तक जग में वट पूजा,
अमर रहे ये प्रेम कहानी।।
– डॉ अनमोल कुमार, झारखण्ड

Related posts

ग़ज़ल – अनिरुद्ध कुमार

newsadmin

सम्मान – राजीव डोगरा

newsadmin

छंद पकैया – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

Leave a Comment