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अस्त्तित्व – नीलांजना गुप्ता

अस्त्तित्व विलय तुझमे करलूँ,

अपनी पहचान मिटा लू मैं।

 

अर्जुन सा संशय त्याग कृष्ण,

की गीता को अपना लू मैं।

 

मैं बनू पितामह का तप ब्रत

ओर द्रुपद सुता का मान बनूँ

 

मैं धर्म राज की सत्य निष्ठ सी

इस जग में पहचान बनूँ

 

अस्तित्व मिटाकर छुद्र बीज

भी विशद वृक्ष बन जाता है

 

वह ही पहचान बनाते हैं

जिनको मिटना आता है।

-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

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