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अनाम रिश्ता – सविता सिंह

कुछ रिश्ते जन्म लेते ही

बहुत जल्दी व्यस्क हो जाते हैं,

समय भले कम मिला हो

पर मन में गहरे उतर जाते हैं।

इसका यह अर्थ नहीं होता

कि उन्हें उस रिश्ते से परहेज़ है,

बस वे अपने प्रेम का प्रदर्शन नहीं करते

मौन ही उनका संदेश है।

वे स्वयं को समेट लेते हैं,

प्रेम का शोर नहीं करते,

भीतर ही भीतर उसे

धड़कन की तरह जीवित रखते।

नाम भले दे न पाते हों,

पर भाव सदा सच्चे रहते हैं,

आघात न पहुँचे किसी को

इसीलिए कदम रोक लेते हैं।

धन्य हैं ऐसे रिश्ते भी,

जो बिना कहे निभ जाते हैं,

दूरी, समय, या नाम बिना

फिर भी जीवन भर रह जाते हैं।

शायद वह चुप करके

किसी से कुछ ना कह कर

अपनी वो अनूठी चाहत

हृदय तक ही रखे आजीवन ।

न कोई दावा, न कोई शोर,

न कोई जग से आग्रह है

बस मन की गहराई में

एक अनाम, पावन सा संबंध है।

– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

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