तुम जीवन गीत बनो साजन,
मधुघट मधुरस छलकाएगा।
फिर प्राची माँग सजाएगी,
अँधियारा अलक सजाएगा।।
यौवन की कच्ची ड्योढ़ी पर,
तानों की हैं बंदनवारें।
लज्जा, घबराहट, समझौते,
श्रमरत हैं, आश्वासन हारें।
स्वीकृति का आलिंगन पा कर-
पतझार, पलाश खिलाएगा।
तुम जीवन गीत बनो साजन,
मधुघट मधुरस छलकाएगा।।….
-मणि अग्रवाल”मणिका”, देहरादून उत्तराखंड