मनोरंजन

बीती होली – सविता सिंह

ये होली भी बीत गयी,

शाम गुलाबी कर गयी।

भीगे मन के आँगन में

यादों की खुशबू भर गयी।

रंगों में डूबे वे क्षण सब,

हँसी ठिठोली के पल सब।

पिचकारी की छप-छप में

मन में उमंगें भर गयी।

बीता जो हर एक पल,

हो गया अब बीता कल।

पलटेंगे फिर वे पन्ने सारे,

जी लेंगे आने वाला कल।

रंगों की ये मधुर कहानी

हर वर्ष फिर दोहराएगी,

फागुन की मीठी दस्तक

जीवन को फिर रंग जाएगी।

– सविता सिंह ‘मीरा’, जमशेदपुर

 

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